रेटिंग: ⭐⭐⭐⭐ (4/5)
निर्देशक: अश्विन कुमार
भक्ति और पौराणिकता को एक भव्य एनिमेटेड अवतार देने वाली फिल्म ‘महावतार नरसिम्हा’ ने सिनेमाघरों में दस्तक दे दी है। अश्विन कुमार द्वारा निर्देशित यह फिल्म सनातन संस्कृति की गहराइयों में उतरती है और एक ऐसी कथा को जीवंत करती है, जिसे पीढ़ियों से हम सुनते आए हैं। मौजूदा सिनेमाई शोर, खासकर ‘सैयारा’ जैसी पॉपुलर फिल्मों के बीच, ‘महावतार नरसिम्हा’ एक आध्यात्मिक अनुभव लेकर आती है जो बच्चों से लेकर बड़ों तक हर किसी के मन को छू जाती है।
फिल्म की शुरुआत होती है ऋषि कश्यप के घर जन्मे दो असुर पुत्रों – हिरण्यकशिपु और हिरण्याक्ष से, जिन्होंने भगवान विष्णु को अपना शत्रु मान लिया। धरती पर अत्याचार बढ़ने पर भगवान विष्णु ने वराह अवतार लेकर हिरण्याक्ष का वध किया। बदले की आग में जलते हिरण्यकशिपु ने ब्रह्मा जी से ऐसा वरदान मांगा कि उसका वध लगभग असंभव हो गया।
लेकिन यहीं जन्म होता है प्रह्लाद का – विष्णु का परम भक्त, जिसने बचपन में ही अपने पिता को चुनौती दी। हिरण्यकशिपु ने प्रह्लाद को मारने के लिए हर संभव प्रयास किए, पर हर बार असफल रहा। अंततः, भगवान विष्णु ने नरसिम्ह अवतार लिया – न आधे दिन, न रात, न मनुष्य, न जानवर – और भक्त की रक्षा के लिए असत्य पर विजय पाई।
फिल्म का सबसे मजबूत पहलू इसकी विज़ुअल अपील और दिल छू लेने वाली स्टोरीटेलिंग है। हर फ्रेम में भक्ति भाव रचा-बसा है। ग्राफिक्स उच्च गुणवत्ता के हैं और एनिमेशन भारतीय पौराणिकता को प्रभावी रूप से दर्शाता है। भगवान विष्णु के करुणा और रौद्र दोनों रूपों का सुंदर चित्रण हुआ है, जो दर्शकों को अंदर तक भावुक कर देता है।
जहां फिल्म कंटेंट के मामले में दमदार है, वहीं मार्केटिंग के मोर्चे पर इसे और आक्रामक होना चाहिए था। इसके सीमित प्रचार-प्रसार के कारण यह आम दर्शकों के बीच चर्चा में नहीं आ सकी। इसके अलावा, इसकी रिलीज़ टाइमिंग भी मुश्किल में डाल सकती है क्योंकि इसे पहले हफ्ते में ही ‘सैयारा’ जैसी बड़ी फिल्म से प्रतिस्पर्धा करनी पड़ रही है।
‘महावतार नरसिम्हा’ केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि एक दिव्य अनुभव है। चाहे आप धार्मिक हों या सिर्फ अच्छी कहानियों में रुचि रखते हों, यह फिल्म आपको निराश नहीं करेगी। विशेषकर बच्चों को इसे दिखाना एक सांस्कृतिक निवेश कहा जा सकता है।
